प्यारा गांव

 रात में जल्दी सोना,भोर में जल्दी का उठना

कुछ ये है सादगी है गांव की

भोर में चिड़ियो का चहचहाना

आज भी जगा देता है यहां

चेहरे पे घुघट,रिस्तो को मायने,

अपनो का प्यार यहां दिखता है

यहां ac तो नही, पर हवा उससे बेहतर है

यहां मेट्रो तो नही पर तांगा आज भी दिखता है

लोग पैसे से तो नही पर दिल के बड़े अमीर है

आँगन औरतो के लिए तो द्वार पुरुषों के लिए

कुछ ऐसी परम्परा आज भी है यहाँ

खेतों की हरियाली,घर के पालतू मवेशी,

खेती में व्यस्त लोग बस यही देखने को मिलता है

कभी ट्यूबबेल तो कभी नदी में नहाना 

पेड़ो के नीचे बच्चो का बेफिक्र खेलना

ये सब देख सारा बचपन याद आ गया

हमारा गांव वही है बस हम कही और खो गए

कभी अच्छी शिक्षा तो कभी नौकरी की तलाश में

तो कभी विलासिता भरे जीवन की चाह में 

हम कहीं और के हो गए...........!!!!!!!

- संजय ✍️

Comments

Popular posts from this blog

Mahakumbh Prayagraj 2025

Mahakumbh 2025

ईरान और इज़राइल युद्ध 2024