लड़ते जाओ बढ़ते जाओ
कुछ यादें खुशी की है कुछ यादें गम के भी है
कुछ यादें मीठे से है कुछ यादें नम् से भी है
मीठी यादें रोज जगाओ खट्टी यादें रोज मिटाओ
चेहरा उसका याद रखो और लड़ते जाओ बढ़ते जाओ
कुछ सपने जो तेरे है कुछ सपने जो मां पापा के है
पूरे उनको करते जाओ आगे यूहीं तुम बढ़ते जाओ
दिन दोगुनी रात चौगुनी हर दिन ये तुम करते जाओ
लक्ष्य हमेशा याद रखो और लड़ते जाओ बढ़ते जाओ
आयेगे कुछ कंटक बनकर राह रोकने इधर उधर से
कुछ शुभचिंतक बन करके कुछ पीछे से वार करेंगे
गांडीव अपने मस्तक में रखना मौके पे तुम देना साध
निर्भय हो कर मार्ग पे अपने तुम लड़ते जाओ बढ़ते जाओ
शिखर जो तुम पा जाओ उसका तुम करना सम्मान
तेज प्रकाश चारो ओर फैलाना करना कभी ना तुम अभिमान
जो तेरे अपने ना भी थे उनका भी तुम करना काम
तेज हमेसा ललाट पे रख के तुम लड़ते जाओ बढ़ते जाओ।
- संजय वर्मा✒️
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