कुंज बिहारी श्री कृष्ण
सिर पे मोर पंख है जिनके, मुरली पे है जिनका हाथ
मां देवकी जिनकी माता, नन्द यशोदा जिनका विश्वास
गोकुल से गहरा है नाता, जग बोले है श्री द्वारकानाथ
भई दीवानी गोपियां है जिनकी, राधा का है जिनको साथ
जिससे डरता था जग सारा, थर्राते थे सारे लोग
ऐसे निरंकुश कंश मामा को, दिया मौत के घाट उतारा
शकुनि जैसा विद्वानी, समझ ना पाए जिनकी माया
अर्जुन का सारथी बनके, कौरव को है नाच नचाया
कभी गोपाल कभी गोविंद, कभी बांके बिहारी कहलाए
कभी पार्थ को संग लेकर, रणछोड़ एकांत पे ले जाए
भीष्म, द्रोण, और कर्ण भी, नतमस्तक है जिनके आगे
युद्धभूमि में धर्म के खातिर, महावीर भी प्राण है त्यागें
पांच गांव से कुरूक्षेत्र तक पांडवो का है साथ निभाए
पृथ्वी पे धर्म के खातिर बार बार किसी रूप मै है आए
जब जब चिंतित हुआ जग सारा, गीता का है पाठ पढ़ाए
सारे जग पे है जिनका साया, कुंज बिहारी श्री कृष्ण कहाए 🙏
- संजय वर्मा
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