ओ पापा की प्यारी गुड़िया


 ओ पापा की प्यारी गुड़िया, माँ की हो तुम दुलारी गुड़िया

तुम मे बसती उनकी जान , करते सब तुमपे कुर्बान...

तुम परी लोक से आयी हो , झोली भर खुशियां लायी हो

इन खुशियों को उनमें भरना , मस्तक उनका ऊंचा करना ।।


दादा दादी की गुड़िया थी, भाई की दोस्त कहाती हो

नाना नानी की लाडो थी , भाभी की ननद बन जाती हो..

जो मन में कुछ चंचलता सुझे , भाई को मार खिलाती हो 😜

जब घर में लाला आ जाए , तुम प्यारी बुआ कहलाती हो ।।


फिर एक समय वो आता जब दूसरे घर को जाती हो

डोली में सज के जाती हो, नए घर की बहू कहाती हो ..

बेटी से मां तक सफर तुम्हारा, सच है ये संघर्ष तुम्हारा

भाभी से लेकर चाची तक बड़ी अम्मा से लेकर नानी तक ।।


तुम ही जग की शान हो , तुम जगत जननी महान हो

 तुम ही सबकी माता हो, तुम ही सबकी निर्माता हो..

सारा ये परिवार तुम्हीं से , सारा ये संसार तुम्हीं से

तुम ही दुर्गा तुम ही काली , तुम ही तो भाग्य विधाता हो..!!

- संजय वर्मा ✍️

Happy daughter's day

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