तुम सूर्य हो तुम चंद्रमा
तुम सूर्य हो तुम चंद्रमा तुम शिखर का आकार हो
चलते चलो इस राह पे तुम स्वयम को निखार लो ।
मझधार की इस धार में तुम नाव हो पतवार हो
जो ना डरे हर हाल में , उस वीर का प्रकार हो ।
जब रास्ते हो कठिन , तुम गांडीव का आधार लो
हर मोह को तुम त्याग के, अर्जुन का तुम आकार लो ।
रख भुजाओं में बल इतना , हर मित्र को नाज हो
जब मित्र हो संकट में तो , तुम कर्ण का अवतार लो ।
हर घाव के हर दर्द को , तुम पूरी तरह नकार दो
जो है अडिग पर्वत खड़ा, उस हिमालय का आकर लो ।
जो है कमी तुममें अभी , उन सब को तुम स्वीकार लो
जो डर विफलता का है मन में, उस डर को तुम निकाल दो
कर मन को अब एकाग्र तू , सिकंदर का तेज उधार लो ।
कर लक्ष्य हासिल जिद थी जो और जीवन को तुम सवार लो ।
- संजय वर्मा ✍️
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