साल की पहली बारिश
सर्द हवाएँ कपकपाती ठंड
हवा में नमी फैला रही ये बारिश
प्याले में चाय भरी कप हो
कुछ ऐसा माहौल बना रही ये बारिश
मधुर मधुर गरजते हुए ये बादल
लोगो को घरों पे बैठा रही ये बारिश
व्यस्तता भरे इस चलते फिरते बाज़ार से
रज़ाई कंबल तरफ़ भगा रही ये बारिश
नये साल का हैंगओवर अभी गया नहीं
इश्क़ का नशा बरसा रही ये बारिश
लोग हाथ मल मल के बैठे हैं आग किनारे
कपल्स का माहौल बना रही ये बारिश
दूर बैठे जो इंतज़ार कर रहे हो मेरा
आपको मेरे पास बुला रही ये बारिश
मैं रहूँ आप रहो बंद कमरे की गर्मी बढ़े
कुछ ऐसा न्यू ईयर माना रही ये बारिश
फटी जिनकी पन्निया टपक रहा टेंट जिनका
उनके फटे हुए बिस्तर को भीगा रही ये बारिश
सर्दियाँ जिनको मौसम नहीं मज़बूरी है
ग़ुरबत में जीते ऐसे लोगो को रुला रही ये बारिश
बेजूवान जानवर आकाश में उड़ते परिंदे
घोंसले के घर पे क़हर बरसा रही ये बारिश
सड़क पे टहलते थे जो क्यूट क्यूट पिल्ले
बेघर जानवरो पे, ज़हर बरसा रही है ये बारिश
खेती में लगी गेहूं की फसलें उनकी नाज़ुक पत्तियाँ
उन पत्तियों की हरियाली को बढ़ा रही ये बारिश
खेती करता भारत फसल उगाते हमारे प्यारे गाँव
किसानों के चेहरे की मुस्कान को बढ़ा रही ये बारिश
बूँद होठों पे चेहरे पे उँगलियाँ फेरती ये सर्द हवाएँ
लोगो के बीच में मोहब्बत फैला रही ये बारिश
रिमझिम बूँदों से पूस की रात का पारा गिराते हुए
2024 का न्यू ईयर कुछ ऐसे माना रही है ये बारिश
- संजय वर्मा ✍️
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