प्रयागराज में रावण की शोभा यात्रा निकाली जाती है, नहीं किया जाता है रावण के पुतले का दहन, जानिए क्या है रावण का प्रयागराज से रिश्ता नाता
Editor & writer: Sanjay verma
जहां पूरे देख में दशहरे की शुरुआत भगवान राम की पूजा और यात्रा के साथ करने की परंपरा है. इसी तरह से हर जगह रावण का दहन किया जाता है. लेकिन, प्रयागराज के कटरा रामलीला कमेटी की रामलीला की शुरुआत रावण की शोभा यात्रा के साथ की जाती है. इस रावण यात्रा में लंकाधिपति रावण के साथ ही उसके परिवारजन को भी रथ पर नगर भ्रमण कराया जाता हैं. इस यात्रा की शुरुआत से पहले रावण का श्रृंगार करने के साथ ही उसकी आरती भी उतारी जाती है. यात्रा की शुरुआत भारद्वाज ऋषि के आश्रम से की जाती है और पूरे कटरा क्षेत्र का भ्रमण किया जाता है और लोग झांकियों का लुफ्त उठाने के साथ साथ रावण को सम्मान भी दिया जाता है ।
जानिए क्या है लंकापति रावण का यहां से नाता, क्यों। नहीं जलाया जाता लंकपति का पुतला
पौराणिक कथा और कहानियों के अनुसार यह माना जाता है की भारद्वाज मुनि जिनका आश्रम प्रयागराज में है, इनकी बेटी इलाविडा का विवाह रावण के पिता विश्वश्रवा के साथ भी हुआ था. इनकी संतान के रूप में कुबेर पैदा हुए थे. इस रिश्ते से प्रयागराज रावण के लिए ननिहाल लगता है और ननिहाल में बच्चों को सिर्फ़ प्यार मिलता है. इसी रिश्ते की वजह से रावण भारद्वाज मुनि का नाती लगता था. इस कारण से भारद्वाज मुनि आश्रम के क्षेत्र की कटरा रामलीला कमेटी की तरफ से दशहरे के दिन रावण का वध भी नहीं किया जाता है. बल्कि, कटरा रामलीला कमेटी के लोग नजदीक की दारागंज रामलीला कमेटी के रावण दहन कार्यक्रम में सिर्फ शामिल होने जाते हैं. उस विवाह के बाद जब रावण यहां आया था तो भारद्वाज आश्रम में मौजूद पुष्पक विमान को भी रावण अपने साथ ले गया था.
बता दें कि प्रयागराज में नवरात्रि के पहले दिन से दशहरे के बाद के पाँच दिन तक लगातार मेला लगाया जाता है पूरा शहर धूम धाम से 15 दिन तक नवरात्रि और दशहरा मानता है। यहाँ एक से बढ़कर एक माता दुर्गा की झांकियाँ लगायी जाती है लाइट और dj से पूरे शहर को मेले के रूप में सजाया जाता है और लोग सारी रात मेले का लुफ्त उठाते है सिर्फ़ रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता क्योंकि रावण प्रयागियों के रिश्तेदार लगते हैं बाक़ी मेला जितना अच्छा यहाँ सजाया जाता है शायद ही किसी और शहर में सजाया जाता होगा । आस्था की नगरी प्रयागराज जितना प्रसिद्ध गंगा यमुना के संगम के लिये है उतना ही प्रसिद्ध नवरात्रि और दशहरे के मेला के लिए भी है ।
- संजय ✍️


Comments
Post a Comment